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Caste Based Reservation: समाज के निचले पायदान के लोगों के लिए समान अवसर मुहैया कराने की नीयत के साथ आरक्षण की व्यवस्था की गई है. पिछले कुछ महीनों के दौरान कुछ राज्यों ने कास्ट सेंसस यानी जाति आधारित जनगणना भी कराई है, ताकि आबादी के लिहाज से आरक्षण की सुविधा दी जा सके.
शरद पवार की सांसद बेटी ने जातिगत आरक्षण पर अपनी राय रखी है. (फाइल फोटो)दरअसल, सुप्रिया सुले से आरक्षण पर सवाल पूछा गया था. इसपर उन्होंने कहा कि सभी के लिए अवसर की समानता होनी चाहिए. सुप्रिया सुले ने कहा, ‘आरक्षण उन्हें मिलना चाहिए जिनको सही मायने में इसकी जरूरत है.’ उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा, ‘मेरे माता-पिता शिक्षित हैं. मैं एजुकेटेड हूं और मेरे बच्चे पढ़े-लिखे हैं. ऐसे में यदि मैं भी आरक्षण की मांग करती हूं तो मुझे इसको लेकर शर्म आनी चाहिए.’ हालांकि, सुप्रयिा सुले ने इसपर और अध्ययन करने और जाति के साथ ही आर्थिक आधार दोनों का एक प्रॉपर कॉम्बिनेशन तैयार कर उसके बेस पर आरक्षण देने की बात कही है. भारतीय राजनीति में आरक्षण हमेशा से ही सेंसिटिव इश्यू रहा है. इस लिहाज से सुप्रिया सुले का यह बयान काफी अहम है.
शरद पवार भी कह चुके हैं बड़ी बात
तमिलनाडु का दिया था उदाहरण
शरद पवार ने आरक्षण को लेकर तमिलनाडु का उदाहरण दिया था. प्रदेश में 72 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है. पवार ने कहा था, ‘अगर आरक्षण के मुद्दों को सुलझाना है, तो राष्ट्रीय स्तर पर ही निर्णय लिए जाने चाहिए. केंद्र सरकार को इस पर फैसला लेना होगा. अगर तमिलनाडु में 72 प्रतिशत आरक्षण दिया जा सकता है, तो उचित समय पर संविधान में संशोधन करके आरक्षण के मुद्दे को सुलझाने के लिए संसद में निर्णय लिया जाना चाहिए.’

बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें
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New Delhi,Delhi
September 21, 2025, 08:38 IST





