भारत » CJI गवई ने क्यों किया ‘पुष्पा’ फिल्म का जिक्र, हिमालयी राज्यों में जंगलों के नुकसान पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

CJI गवई ने क्यों किया ‘पुष्पा’ फिल्म का जिक्र, हिमालयी राज्यों में जंगलों के नुकसान पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

Facebook
Twitter
WhatsApp

Last Updated:

CJI BR Gavai News: सुप्रीम कोर्ट ने हिमालयी राज्यों में जंगलों के नुकसान पर चिंता जताई और सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर 17 सितंबर तक जवाब दाकिळ करने को कहा. सुनवाई के दौरान सीजेआई गवई ने ‘पुष्पा’ फिल्म का…और पढ़ें

CJI गवई ने क्यों किया 'पुष्पा' फिल्म का जिक्र? जंगलों के नुकसान पर SC सख्तसुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ‘पुष्पा’ फिल्म का जिक्र किया. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली. हिमालयी राज्यों में पेड़ों की अवैध कटाई और उसके कारण हो रहे लैंडस्लाइड और वनों के नुकसान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती अपनाई है. इस मुद्दे पर दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार, हिमाचल प्रदेश सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने सभी से 17 सितंबर तक जवाब दाखिल करने को कहा है. सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस बी आर गवई ने पर्यावरणीय स्थिति पर चिंता जताई और कहा, “एक दक्षिण भारतीय फिल्म ‘पुष्पा’ में रक्तचंदन की लकड़ी को लेकर जो दृश्य दिखाया गया था, वैसा ही वीडियो हमने इस मामले में भी देखा है, जिसमें पानी में लकड़ियां तैर रही हैं. यह बहुत ही गंभीर स्थिति है.”

याचिका में यह आरोप लगाया गया है कि हिमालयी क्षेत्रों में तेजी से पेड़ों की कटाई हो रही है, जिससे न केवल वनों को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि भूस्खलन और प्राकृतिक आपदाओं का खतरा भी बढ़ गया है. सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को जानकारी दी कि उन्होंने हाल ही में पर्यावरण सचिव से इस मुद्दे पर चर्चा की है और मुख्य सचिव ने हिमालयी राज्यों के मुख्य सचिवों से भी बात की है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस पर जल्द ही रिपोर्ट दाखिल करेगी.

याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में पेड़ों की कटाई और भूस्खलन पर स्वतः संज्ञान लिया था. उन्होंने आग्रह किया कि इस मामले को अन्य हिमालयी राज्यों में वन कटाई से जुड़े स्वतः संज्ञान मामलों के साथ जोड़कर एक साथ सुनवाई की जाए. प्रधान न्यायाधीश ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, “पहले 55 पेड़ प्रजातियों को संरक्षित श्रेणी में रखा गया था, जिनकी कटाई पर प्रतिबंध था. लेकिन नई अधिसूचना ने संरक्षित प्रजातियों की संख्या कम कर दी है.”

सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए सभी संबंधित पक्षों को जवाब देने का समय दिया है और अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी. यह मामला देश के पर्यावरण और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा से जुड़ा है, जिस पर सर्वोच्च अदालत ने अब पैनी नजर रखनी शुरू कर दी है.

authorimg

Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h… और पढ़ें

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
homenation

CJI गवई ने क्यों किया ‘पुष्पा’ फिल्म का जिक्र? जंगलों के नुकसान पर SC सख्त

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share Market

Share Market

Gold & Silver Price

Should NEET exam be conducted again?

टॉप स्टोरी