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ईए-18जी ग्राउलर अमेरिका का एक ऐसा हवाई योद्धा है जो खुद बम नहीं बरसाता लेकिन फिर भी किसी भी आर्मी के पास इससे घातक हथियार नहीं हो सकता. इसने अपने इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रहार से वेनेजुएला में दुश्मन के आधुनिक रडार सिस्टम को पूरी तरह अंधा कर दिया था. ग्राउलर की जैमिंग तकनीक के कारण वेनेजुएला की सेना आपस में संवाद नहीं कर पाई. इसी डिजिटल सुरक्षा कवच की आड़ में अमेरिकी कमांडो ने मादुरो के किले पर कब्जा किया. यह विमान साबित करता है, चलिए हम आपको इसके बारे में विस्तार में बताते हैं.
बेहद खतरनाक है ये विमान. (File Photo)नई दिल्ली. कराकस का आसमान 3 जनवरी 2026 की उस काली रात को अचानक चीख उठा लेकिन वहां मौजूद वेनेजुएला के रडार ऑपरेटरों को अपनी स्क्रीन पर मौत का कोई निशान तक नहीं दिखा. जब अमेरिकी स्टील्थ विमानों का बेड़ा शहर की दहलीज पर था तब रूस के अभेद्य माने जाने वाले S-300 सिस्टम पूरी तरह अंधे और बहरे हो चुके थे. यह कोई जादू नहीं था बल्कि आसमान में मंडराते EA-18G Growler का इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रहार था. अदृश्य लहरों के इस योद्धा ने पलक झपकते ही पूरे शहर का कम्युनिकेशन नेटवर्क काट दिया. सेना के रेडियो पर सिर्फ सन्नाटा था और रडार स्क्रीन पर सफेद धुंध. ग्राउलर ने वह डिजिटल दीवार खड़ी कर दी थी, जिसके पीछे छिपकर डेल्टा फोर्स के हेलीकॉप्टर्स ने मादुरो के किले में दस्तक दी. यह महज एक हमला नहीं था बल्कि इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के इतिहास का वह सबसे घातक अध्याय था, जिसने साबित कर दिया कि जिस देश के पास ‘ग्राउलर’ जैसी शक्ति है, वह युद्ध शुरू होने से पहले ही उसे जीत चुका है.
क्या है EA-18G Growler और इसकी ताकत?
EA-18G ग्राउलर अमेरिकी नौसेना का प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) विमान है. यह मशहूर फाइटर जेट F/A-18F सुपर हॉर्नेट का ही एक एडवांस्ड वर्जन है. लेकिन जहां हॉर्नेट का काम मिसाइलें दागना है, वहीं ग्राउलर का काम दुश्मन के दिमाग यानी उसके रडार और संचार तंत्र को जाम करना है. इस विमान की सबसे बड़ी खूबी इसका ALQ-99 जैमिंग पॉड है. यह पॉड दुश्मन के रडार सिग्नल्स को पकड़ता है और उन पर इतनी शक्तिशाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगें छोड़ता है कि रडार स्क्रीन पर केवल सफेद शोर (Noise) दिखने लगता है. सरल शब्दों में कहें तो यह दुश्मन की आंखें फोड़ने और उसके कान बहरे करने में माहिर है.
वेनेजुएला स्ट्राइक में ग्राउलर की भूमिका
वेनेजुएला के पास रूस द्वारा निर्मित S-300 और Buk-M2E जैसे खतरनाक एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम थे. किसी भी सामान्य विमान के लिए इन मिसाइलों से बचकर कराकस तक पहुंचना नामुमकिन था. लेकिन ऑपरेशन शुरू होते ही ग्राउलर विमानों ने मोर्चा संभाल लिया:
• रडार जैमिंग: जैसे ही वेनेजुएला के रडार ने अमेरिकी विमानों को डिटेक्ट करने की कोशिश की, ग्राउलर ने उन्हें ‘जाम’ कर दिया. ऑपरेटरों को अपनी स्क्रीन पर कुछ भी समझ नहीं आ रहा था.
• कम्युनिकेशन ब्लैकआउट: ग्राउलर ने वेनेजुएला की सेना के रेडियो और सैटेलाइट सिग्नल्स को ब्लॉक कर दिया. नतीजा यह हुआ कि मादुरो के कमांडर अपने सैनिकों को आदेश तक नहीं दे पाए.
• सीथ (SEAD) मिशन: इसका मतलब है ‘दुश्मन के हवाई बचाव का दमन’. ग्राउलर ने न केवल रडार को जाम किया, बल्कि AGM-88 HARM मिसाइलों के जरिए उन रडार केंद्रों को शारीरिक रूप से नष्ट भी कर दिया.
क्यों है यह दुनिया का सबसे खतरनाक विमान?
ग्राउलर की तकनीक इसे किसी भी पारंपरिक फाइटर जेट से अलग बनाती है. इसमें दो क्रू मेंबर होते हैं—एक पायलट और दूसरा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर ऑफिसर (EWO). EWO का काम दुश्मन के सिग्नल की पहचान करना और उसे ‘काउंटर’ करना होता है. इसकी इंसीडेंटल जैमिंग क्षमता इतनी सटीक है कि यह दुश्मन के फोन कॉल्स तक को सुन सकता है और उन्हें बीच में ही काट सकता है. वेनेजुएला में डेल्टा फोर्स के जवानों को महल में उतारते वक्त इसी विमान ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी सुरक्षा गार्ड मदद के लिए फोन न कर सके.
भविष्य के युद्धों का चेहरा
आज के दौर में युद्ध केवल गोलियों और बमों से नहीं बल्कि डेटा और सिग्नल्स से जीते जाते हैं. EA-18G ग्राउलर इस बात का जीता-जागता प्रमाण है. वेनेजुएला स्ट्राइक ने साबित कर दिया कि अगर आपके पास आसमान में इलेक्ट्रॉनिक प्रभुत्व है तो आप दुनिया के सबसे अभेद्य किले को भी बिना किसी नुकसान के भेद सकते हैं. ग्राउलर ने न केवल मिशन को सफल बनाया बल्कि अमेरिकी जवानों की जान भी बचाई.
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पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें
January 08, 2026, 05:01 IST





