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Ethiopian Prime Minister Abiy Ahmed: पीएम मोदी पहुंचे जिस इथियोपिया में, जानें वहां के पीएम का सैनिक से शीर्ष पद तक का सफर, जीता नोबेल पुरस्कार

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Ethiopian Prime Minister Abiy Ahmed: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अदीस अबाबा में इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली से मिलेंगे, जिन्होंने सैनिक से नेता बनकर नोबेल पुरस्कार जीता और देश में कई सुधार किए.

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पीएम मोदी गए हैं जिस देश, वहां के पीएम सैनिक से पहुंचे शीर्ष पद तक, जीता नोबेलअबी अहमद अली ने 2010 में राजनीतिक करियर बनाने के लिए सेना छोड़ने से पहले लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर थे.

Ethiopian Prime Minister Abiy Ahmed: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 से 17 दिसंबर तक इथियोपिया की राजकीय यात्रा पर रहेंगे. इस दौरान पीएम मोदी अदीस अबाबा में इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली से मुलाकात करेंगे और अन्य कार्यक्रमों में शामिल होंगे. अबी अहमद अली सेना से राजनीति में कदम रखते हुए न केवल देश के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री बने. बल्कि उन्होंने शांति का नोबेल पुरस्कार भी जीता. अबी अहमद सेना और खुफिया तंत्र की ऊंचाइयों से निकलकर एक ऐसे समय में राजनीति के शीर्ष पर पहुंचे, जब देश गहरे राजनीतिक संकट में था. उनकी सैन्य पृष्ठभूमि ने उन्हें एक मजबूत और अनुशासित नेता की छवि दी, जबकि उनके शुरुआती सुधारों ने उन्हें एक आशा की किरण के रूप में स्थापित किया.

अबी अहमद अली ने अपनी उच्च शिक्षा (कंप्यूटर विज्ञान, नेतृत्व और अर्थशास्त्र में डिग्री) अदीस अबाबा विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने सैन्य प्रशिक्षण लिया और इथियोपियाई राष्ट्रीय रक्षा बल (ENDF) में शामिल हुए. अबी अहमद अली ने अपना करियर एक सैनिक के रूप में शुरू किया और इथियोपिया-इरिट्रिया युद्ध (1998-2000) में लड़े. अपनी प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता के कारण वे तेजी से पदोन्नत हुए और उच्च पद पर पहुंचे. उन्होंने लेफ्टिनेंट कर्नल का पद प्राप्त किया था, जो एक वरिष्ठ कमांड स्तर का पद है.

खुफिया विभाग के प्रमुख रहे
अबी अहमद अली की सबसे महत्वपूर्व और प्रभावशाली भूमिका इथियोपियाई नेशनल इंटेलिजेंस एंड सिक्योरिटी सर्विस (NISS) के उप-निदेशक और फिर निदेशक (2008-2015) के रूप में थी. इस दौरान वह सीधे तौर पर तत्कालीन प्रधानमंत्री मेलेस जेनावी के अधीन काम करते थे और देश की सुरक्षा एवं खुफिया मामलों की जिम्मेदारी संभालते थे. उन्हें इथियोपिया की सूचना नेटवर्क सुरक्षा एजेंसी (INSA) के प्रमुख के रूप में भी नियुक्त किया गया था, जो देश की साइबर सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है.

इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त करने के बाद पदक और डिप्लोमा के साथ.

कैसे आए सेना से राजनीति में
अबी अहमद का राजनीति में आना एक सीधा करियर बदलाव नहीं, बल्कि इथियोपिया की जटिल राजनीतिक संरचना और उनकी खुद की रणनीतिक स्थिति का परिणाम था. वह इथियोपिया के तत्कालीन शासक गठबंधन, इथियोपियन पीपल्स रेवोल्यूशनरी डेमोक्रेटिक फ्रंट (EPRDF) के अंग ओरोमो पीपल्स डेमोक्रेटिक ऑर्गनाइजेशन (OPDO) के सदस्य थे. OPDO,ओरोमो क्षेत्र (देश का सबसे बड़ा एथनिक समूह) का प्रतिनिधित्व करता है. उनकी सैन्य-खुफिया पृष्ठभूमि और ओरोमो पहचान ने उन्हें दल के भीतर एक मजबूत उम्मीदवार बना दिया.

विवादास्पद समय में राजनीतिक भूमिका
2015-2016 में इथियोपिया के ओरोमिया और अम्हारा क्षेत्रों में सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर जन-विरोध प्रदर्शन हुए. इन प्रदर्शनों को कुचलने में सुरक्षा बलों की कार्रवाई के कारण सैकड़ों लोग मारे गए. इस संकट के दौरान अबी अहमद को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री (2015) बनाया गया. यह पद एक तकनीकी मंत्रालय का था, लेकिन यहां से उन्होंने खुद को एक राजनीतिज्ञ के रूप में स्थापित करना शुरू किया. फरवरी 2018 में OPDO (जिसका नाम बदलकर ओरोमो डेमोक्रेटिक पार्टी – ODP कर दिया गया) ने उन्हें अपना अध्यक्ष चुना. चूंकि EPRDF गठबंधन में ODP प्रमुख दल था, इसलिए गठबंधन के अध्यक्ष और देश के प्रधानमंत्री के रूप में उनका चुनाव स्वाभाविक कदम था. उन्होंने अप्रैल, 2018 में प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली.

रिफॉर्मर की छवि से मिला उभार
अबी अहमद के राजनीति में आने और तेजी से उभरने का सबसे बड़ा कारण था उनकी ‘परिवर्तनकारी सुधारक’ की छवि. उन्होंने सत्ता संभालते ही राजनीतिक बंदियों को रिहा करना शुरू किया. प्रेस स्वतंत्रता पर लगी पाबंदियों को हटाया. सबसे बड़ा कदम इरिट्रिया के साथ 20 साल पुराने गतिरोध को समाप्त करने की घोषणा की, जिसके लिए उन्हें 2019 का नोबेल शांति पुरस्कार मिला. उन्होंने ‘मेडेमर’ (सामंजस्य) और ‘एरिटी’ (दूसरों को शामिल करना) जैसे नारे दिए. हालांकि, बाद के वर्षों में टिगरे संघर्ष और मानवाधिकार मुद्दों ने उनकी छवि को चुनौती दी है. लेकिन फिर भी वह लोकप्रिय प्रधानमंत्री बने हुए हैं.

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पीएम मोदी गए हैं जिस देश, वहां के पीएम सैनिक से पहुंचे शीर्ष पद तक, जीता नोबेल

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