दरअसल, अब तक पूर्वोत्तर भारत को जोड़ने के लिए देश पूरी तरह से ‘चिकन नेक’ गलियारे पर निर्भर था. यही वह इलाका था जिस पर चीन और बांग्लादेश की नजरें हमेशा टिकी रहती थीं, लेकिन इस नई रेल लाइन के शुरू होने से इस चिंता का काफी हद तक समाधान हो जाएगा.
110KM लंबी रेल लाइन, 100 KMpH से दौड़ेगी ट्रेन
यह रेलमार्ग कटिहार-पूर्णिया-अररिया से होकर गलगलिया और फिर न्यू जलपाईगुड़ी तक जुड़ता है. इस तरह न केवल सीमांचल के अररिया और किशनगंज जिलों को नई सौगात मिली है, बल्कि पश्चिम बंगाल और नेपाल तक सीधा फायदा पहुंचेगा.
चिनक नेक पर निर्भरता खत्म
लोगों का सपना पूरा
सीमांचल के स्थानीय लोगों के लिए यह केवल एक रेल सेवा नहीं बल्कि जीवन का सपना है. अनवर, कुर्बान और शमसुल जैसे आम लोगों ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनके घर के पास ट्रेन की सीटी बजेगी. कुर्बान का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी के काम की असली पहचान ऐसे ही विकास कार्यों से होती है. शमसुल ने कहा कि अब अररिया से किशनगंज तक रेल से सफर संभव होगा और इससे माल ढुलाई व यात्राएं आसान हो जाएंगी.
लंबा इंतजार और नई उम्मीदें
इस परियोजना का सपना पहली बार 2006 में देखा गया था, लेकिन इसे पूरा होने में 18 साल लग गए. करीब 2300 करोड़ रुपये की लागत से यह काम पूरा हुआ है. इस दौरान इलाके के लोगों ने लंबा इंतजार किया, लेकिन अब जब यह सपना साकार हो रहा है तो उनके चेहरों पर उम्मीद की नई चमक दिख रही है.
कुल मिलाकर अररिया-गलगलिया रेल लाइन न सिर्फ सीमांचल के लिए विकास और समृद्धि की नई राह खोलेगी बल्कि भारत की सुरक्षा रणनीति को भी नई मजबूती देगी. अब चिकन नेक पर पूरी तरह निर्भर रहने की मजबूरी खत्म हो जाएगी और चीन या बांग्लादेश की ओर से कोई भी खतरा भारत के लिए चिंता का कारण नहीं बनेगा.





