विदेश » Japan No Land For Muslim Burial| Japan Denies Muslim Cemetery:’मुसलमानों को शव दफनाने हैं, तो अपने देश भेज दें’, जापान ने ठुकराई कब्रिस्तान की मांग, संस्कृति से समझौता नहीं

Japan No Land For Muslim Burial| Japan Denies Muslim Cemetery:’मुसलमानों को शव दफनाने हैं, तो अपने देश भेज दें’, जापान ने ठुकराई कब्रिस्तान की मांग, संस्कृति से समझौता नहीं

Facebook
Twitter
WhatsApp

Agency:एजेंसियां

Last Updated:

Japan Denies Muslim Cemetery: दुनियाभर में जापान को अपने सांस्कृतिक उसूलों के लिए जाना जाता है. वो कभी भी इससे समझौता करने को तैयार नहीं होता है. एक बार फिर से जापान ने अपनी इसी पहचान को कायम रखते हुए कब्रिस्तान बनाने की मुस्लिमों की मांग को रिजेक्ट कर दिया. उनका कहना है कि जापान में यहां के हिसाब से रहना होगा.

मुसलमानों को शव दफनाने हैं, तो अपने देश भेजें, जापान नहीं बनाएगा कब्रिस्तानजापान ने लिया कड़ा फैसला. (Credit- Reuters)

जब भी जापान का नाम हम सुनते हैं, आंखों के सामने साफ-सुथरा और ऐसा देश नाचता है, जो सांस्कृतिक रूप से बहुत समृद्ध है. जापान में बच्चों की पढ़ाई-लिखाई से लेकर उनकी ग्रूमिंग तक का तरीका काफी अलग और दिलचस्प है. यहां का कल्चर ही यहां की पहचान है और वे कभी इसके साथ समझौता नहीं करते. कई बार इसके इस देश को विवादों में भी घिरना पड़ता है, कुछ ऐसा ही इस वक्त हो रहा है. जापान का एक फैसला इस समय चर्चा में है.

दरअसल यहां रहने वाले मुस्लिमों की मांग थी कि जापान में उनके लिए अलग से एक कब्रिस्तान का निर्माण कराया जाए, जहां पर वे अपनों की मौत के बाद उनके शव को दफना सकें. इसे लेकर संसद तक बात पहुंची तो संसद सत्र के दौरान सांसद मिजूहो उमेमुरा ने देश में मुस्लिम कब्रिस्तानों के विस्तार की मांग को साफ तौर पर खारिज कर दिया. उनका कहना है कि जापान में 99 फीसदी से अधिक लोगों का अंतिम संस्कार परंपरा के अनुसार दाह-संस्कार से होता है और यही जापान की संस्कृति है.

क्यों जापान ने ठुकराई कब्रिस्तान की मांग?

जापानी सांसद उमेमुरा ने कहा – ‘मुस्लिम कब्रिस्तानों की मांग स्वीकार नहीं है. जापान में दाह-संस्कार परंपरा है. मुसलमानों के लिए उचित तरीका यही है कि वे अपने प्रियजनों के शव अपने देशों को भेजें और वहां दफनाएं.’ यह बयान ऐसे समय आया है जब जापान की महिला प्रधानमंत्री सानेए ताकाइची कड़ा रुख रखने वाली कंजर्वेटिव नेता हैं. उन्हें अक्सर जापान फर्स्ट की नीति के लिए जाना जाता है. वे कई बार कह चुकी हैं कि विदेशी कामगारों का स्वागत है, लेकिन उन्हें जापान के नियम-कानून और परंपराओं का पालन करना होगा.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share Market

Share Market

Gold & Silver Price

Should NEET exam be conducted again?

टॉप स्टोरी