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Remo D’Souza Khatu Shyam Ji: फिल्म डायरेक्टर रेमो डिसूजा खाटूश्याम जी मंदिर पहुंचे और विधि विधान के अनुसार बाबा श्याम के दर्शन किए. रेमो ने पूजा और भजन में भाग लिया और मंदिर के पवित्र वातावरण का अनुभव किया. इस अवसर पर मंदिर में भक्तों और मीडिया का खास आकर्षण बना. रेमो डिसूजा की धार्मिक यात्रा ने खाटूश्याम जी मंदिर में एक उत्सव जैसा माहौल बना दिया. बॉलीवुड और श्रद्धालुओं के बीच यह घटना चर्चा का विषय बनी, और रेमो ने अपने आध्यात्मिक अनुभव साझा कर लोगों के दिल में सम्मान और श्रद्धा बढ़ाई.
KhatuShyam Ji: विश्व प्रसिद्ध बाबा श्याम को हारे का सहारा कहा जाता है. मान्यता है जो भी भक्त बाबा श्याम के दरबार में आकर मन्नत मांगता है वह पूरी हो जाती है. बाबा श्याम के इस मंदिर में प्रसिद्ध नेता, अभिनेता, खिलाड़ी सहित सभी शीश नवाने और मन्नत मांगने आते हैं. इसी कड़ी में भारतीय फिल्म जगत के मशहूर कोरियोग्राफर और फिल्म निर्देशक रेमो डिसूजा खाटूश्याम मंदिर पहुंचे. यहां उन्होंने सम्पूर्ण विधि विधान से बाबा के दर्शन किए.
श्री श्याम मंदिर कमेटी ने भी उनका स्वागत किया. मंदिर कमेंटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि रेमो डिसूजा अपनी टीम के साथ मंदिर पहुंचे थे. अभी ने बाबा श्याम की पूजा-अर्चना कर बाबा श्याम का आशीर्वाद लिया. इस दौरान मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं में भी उन्हें देखने के लिए उत्साह देखा गया. दर्शन के बाद रेमो डिसूजा श्री श्याम मंदिर कमेटी के कार्यालय में गए जहां उनका श्याम दुपट्टा और भगवान श्री कृष्ण की फोटो देखते कमेटी के सदस्यों ने सम्मानित किया.
दर्शन के बाद मंदिर में घूमने दिखे रेमो
बाबा श्याम के दर्शन के बाद रेमो डिसूजा मंदिर में घूमते दिखे. वे करीब एक घंटे तक मंदिर में रहे. इस दौरान उन्होंने श्याम भक्तों के साथ बात चित भी की. रेमो ने कहा कि बाबा श्याम की महिमा निराली है. वे करोड़ों भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं. मैं भी अपनी मन्नत लेकर बाबा श्याम के दर पर आया हु. इस मंदिर में भक्तों का उत्साह देखकर बहुत अच्छा लग रहा है. इसके अलावा मंदिर कमेटी की व्यवस्थाओं की भी रेमो ने सराहना की. उन्होंने कहा इतनी कम जगह में लाखों भक्तों की सुगमता से दर्शन व्यवस्था करना आम बात नहीं है.
जानिए कौन है बाबा श्याम
बाबा श्याम को हारे का सहारा कहा जाता है और उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का अवतार माना जाता है. महाभारत युद्ध के दौरान भीम के पौत्र बर्बरीक कौरवों की ओर से युद्ध में उतरने जा रहे थे, तभी भगवान श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण वेश में उनसे शीश दान मांगा. बर्बरीक ने बिना झिझक भगवान कृष्ण को अपना शीश दान कर दिया. इससे प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने वरदान दिया कि कलियुग में उन्हें श्याम नाम से पूजा जाएगा और वे हारे हुए लोगों के सहारा बनेंगे. तभी से बाबा श्याम भक्तों के बीच हारे के सहारे के नाम से पूजे जाते हैं.
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Sikar,Rajasthan
March 09, 2026, 11:19 IST





