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Parenting Tips: बच्चों को सोशल ट्रॉफी न समझें, माता-पिता कैसे बनें दोस्त? CBSE ने 21 पॉइंट्स में सब समझा दिया

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CBSE Parenting Tips: सीबीएसई ने पेरेंट्स और बच्चों की बॉन्डिंग बेहतर करने के लिए कुछ टिप्स शेयर किए हैं. इन्हें मानकर आप अपने बच्चों के साथ अच्छा रिश्ता कायम कर सकते हैं.

बच्चों को सोशल ट्रॉफी न समझें, माता-पिता कैसे बनें दोस्त? CBSE ने सब समझा दियाCBSE Parenting Tips: सीबीएसई के पेरेंटिंग टिप्स से बच्चे में लाइफ स्किल्स डेवलप होंगी
नई दिल्ली (CBSE Parenting Tips). मौजूदा दौर पेरेंटिंग के लिहाज से बहुत चैलेंजिंग है. पढ़ाई का प्रेशर, सोशल मीडिया, दोस्ती-रिश्ते, भावनाएं.. इन सबके बीच बच्चों और माता-पिता, दोनों के लिए समझ-बूझ के साथ चलना जरूरी हो गया है. इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने पेरेंटिंग गाइडलाइंस जारी की हैं. इनमें 21 टिप्स दिए गए हैं, जिससे माता-पिता अपने बच्चों के साथ पॉजिटिव और सेंसिटिव व्यवहार कर सकें. इससे बच्चों की लाइफ स्किल्स भी बेहतर होंगी.

सीबीएसई का फोकस सिर्फ बच्चों के रिजल्ट पर नहीं है, बल्कि उन्हें मानसिक रूप से मजबूत, कॉन्फिडेंट, समझदार और सोशली सेंसिटिव बनाने पर है. सीबीएसई के पेरेंटिंग टिप्स अपनाकर न केवल घर का माहौल खुशनुमा होगा, बल्कि बच्चे हर तरह के दबाव और चुनौतियों से भी बेहतर तरीके से निपट सकेंगे. इन पेरेंटिंग टिप्स में कई बातों पर फोकस किया गया है, जैसे बच्चों के गलती करने पर माता-पिता का रिएक्शन कैसा हो, बच्चों पर डांट का क्या असर पड़ता है, आदि.

बच्चे की गलती पर माता-पिता क्या करें?

बच्चों के गलती करने पर सभी पेरेंट्स का रिएक्शन अलग होता है. ऐसे मामले में तुरंत डांटने पर बच्चे का कॉन्फिडेंस शेक हो सकता है. उसमें डर और असुरक्षा की भावना विकसित हो सकती है. अगर आप भी बच्चे की गलती पर उसे समझाने के बजाय तुरंत डांट देते हैं तो एक बार सीबीएसई का ‘गोल्डन रेशियो ऑफ 5:1’ समझने की कोशिश करें. इसका मतलब है कि अगर आप बच्चे को 1 नेगेटिव बात कह रहे हैं तो उसके बाद कम से कम 5 पॉजिटिव बातें जरूर कहें.

हर बच्चे में होती है कुछ खासियत

सीबीएसई पेरेंटिंग टिप्स में हर बच्चे को यूनीक यानी अलग बताया गया है. इसलिए उसकी तुलना दूसरों से करने या उसे सिर्फ ‘सोशल ट्रॉफी’ की तरह ट्रीट करने से बचना चाहिए. बच्चे की पहचान सिर्फ उसकी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उसकी सोच, प्रयास, मूल्यों और असली स्वभाव से होती है. इसी तरह, उसे अनुशासन सिखाते समय अपशब्दों, डांट-फटकार या चिल्लाने से बचना चाहिए. यह जरूरी है कि बच्चा माता-पिता के संरक्षण में सुरक्षित महसूस करे, न कि डरा हुआ रहे.

सीबीएसई के 21 पेरेंटिंग टिप्स

  1. गोल्डन रेशियो ऑफ 5:1- गलती बताने से पहले कम-से-कम 5 अच्छी बातों की तारीफ करें.
  2. हर बच्चा यूनीक है – हर बच्चे की अपनी अलग पहचान और खासियत होती है.
  3. सोशल ट्रॉफी न समझें- सिर्फ उपलब्धियों के लिए बच्चे को दिखावा न बनाएं.
  4. जरूरी है सुरक्षा का अहसास- घर में बच्चे को सुरक्षित महसूस कराएं.
  5. बिताएं क्वॉलिटी टाइम– बच्चे को समय दें, उससे बातचीत करें.
  6. तरीके से सिखाएं अनुशासन- स्पष्ट तरीके से अनुशासन लागू करें, न कि डांट या धमकाकर.
  7. समझें नेगेटिव बिहेवियर की वजह- बुरी आदतों के पीछे छिपे इमोशनल या बाहरी कारण समझें.
  8. बच्चों को भी चाहिए सम्मान- बच्चे को सिखाएं कि हर व्यक्ति का सम्मान करना चाहिए और आप खुद भी बच्चे का सम्मान करें.
  9. सिखाएं टीमवर्क- बच्चों को मिल-जुल कर काम करना सिखाएं.
  10. सहानुभूति और संवेदनशीलता विकसित करें- दूसरों की भावनाओं को महसूस करना सिखाएं.
  11. पैसे का महत्व सिखाएं- बचत, खर्च और जरूरतों के बीच संतुलन समझाएं.
  12. सोशल स्किल्स सीखने के मौके दें- संवाद, दोस्ती, सामाजिक मेल-जोल आदि.
  13. स्कूल और शिक्षा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण- सीखने और टीचर-स्कूल को सम्मान देने की भावना जगाएं.
  14. प्रॉब्लम सॉल्विंग और क्रिटिकल थिंकिंग- बच्चों में सोचने-विचारने और समस्या सुलझाने की क्षमता विकसित करें.
  15. रेजिलियंस (संघर्ष झेलने की क्षमता)- मुश्किलों और असफलताओं से उबरने की शक्ति विकसित करें.
  16. प्लानिंग और ऑर्गेनाइजेशन सिखाएं- कामों को व्यवस्थित करने, समय प्रबंधन की आदत डालें.
  17. बच्चों के लिए छोटे-छोटे गोल्स बनाएं- बच्चे के लिए लक्ष्य बनाएं और उनके पूरे होने पर उसे प्रोत्साहित करें.
  18. खुलकर बातचीत करें- बच्चों से उनकी इच्छाएं, डर, मन की बातें पूछें, लेकिन आपका लहजा जासूसी या डराने वाला नहीं होना चाहिए.
  19. भावनाएं शेयर करने के लिए प्रेरित करें- बच्चे को यह जताएं कि भावनाएं शेयर की जा सकती हैं. जब आप उनसे अपने दिल की कुछ बात करेंगे तो वे भी बताने में हिचकिचाएंगे नहीं.
  20. दोस्तों की कद्र करें और प्राइवेसी का सम्मान करें- बच्चे के दोस्तों को महत्व दें, उनका सम्मान करें और घर आने पर उन्हें प्राइवेसी दें.
  21. सीमाओं के साथ जरूरी है दोस्ती- बच्चों के साथ दोस्ताना रवैया रखें लेकिन उनके बेहतर विकास के लिए कुछ सीमाएं भी निर्धारित करें.

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Deepali Porwal

Having an experience of more than 10 years, she loves to write on anything and everything related to lifestyle (health, beauty, fashion, travel, astrology, numerology), entertainment and career. She has covered…और पढ़ें

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