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PM Modi 75th Birthday: संकट को बनाया अवसर, हर चुनौती की पार… पीएम मोदी की दुनिया में यूं ही नहीं धाक

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को अपना 75वां जन्मदिन मनाने जा रहे हैं. यह साल उनके राजनीतिक जीवन और देश के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है. अमेरिका की तरफ से लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ, नई गठबंधन राजनीति, आर्थिक चुनौतियां… ये सभी पीएम मोदी के सामने एक बड़ी परीक्षा की तरह खड़ी हैं. लेकिन उनके पिछले सफर को देखें तो हर संकट को एक अवसर में बदलकर और भी मजबूत होकर आगे बढ़ने के उदाहरण मिलते हैं.

ट्रंप टैरिफ से लेकर कूटनीतिक अवसर तक: अगस्त में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर भारी टैरिफ लगाए. इसे देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक झटका माना गया. लेकिन पीएम मोदी ने हार नहीं मानी. किसानों, छोटे उद्योगों और देश के हितों के लिए किसी भी दबाव का सामना करने की घोषणा की. इसके तुरंत बाद मोदी ने कूटनीतिक कदम उठाते हुए ब्राजील के राष्ट्रपति लूला, रूस के राष्ट्रपति पुतिन और चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग से बातचीत की. शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) सम्मेलन में उनकी भागीदारी ने अमेरिका को असहज कर दिया. अमेरिका के पूर्व सलाहकार जॉन बोल्टन ने कहा कि ट्रंप की कार्रवाई ने मोदी को रूस-चीन ब्लॉक के करीब ला दिया.

GST 2.0 जनता के लिए बड़ा तोहफा: 15 अगस्त को लाल किले से पीएम मोदी ने ऐतिहासिक GST संशोधन की घोषणा की. अब केवल दो टैक्स स्लैब होंगे – 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत. इससे दैनिक आवश्यकताओं से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक कई वस्तुओं की कीमतें कम हो गईं. यह नई व्यवस्था 22 सितंबर से, यानी नवरात्रि के पहले दिन से लागू होगी. त्योहार के मौसम में यह जनता के लिए डबल गिफ्ट बन जाएगा.

अतीत से ही संघर्ष: 2002 में गुजरात दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी का राजनीतिक जीवन खतरे में था. लेकिन उस संकट को पार कर उन्होंने गुजरात को एक विकासशील राज्य के रूप में खड़ा किया. उस मॉडल ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया. इसी तरह कोरोना के समय भी आलोचनाओं का सामना करते हुए दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम लागू कर भारत को आत्मनिर्भरता की ओर ले गए.

2024 चुनाव और गठबंधन राजनीति में भी दम: 2024 में BJP को पूर्ण बहुमत न मिलने पर मोदी को गठबंधन सरकार चलानी पड़ी. कई लोगों ने इसे उनकी अंतिम चरण माना. लेकिन केवल एक साल में ही हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली में लगातार जीत हासिल कर आलोचकों को चौंका दिया. वक्फ संशोधन बिल, CAA लागू करने जैसे मुद्दों को आगे बढ़ाकर उन्होंने गठबंधन राजनीति में भी अपनी दृढ़ता दिखाई.

ग्लोबल साउथ का नेतृत्व: तीसरी बार प्रधानमंत्री बने मोदी ने पश्चिमी दबाव का सामना करते हुए ग्लोबल साउथ के प्रतिनिधि के रूप में खड़े हुए. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बुलावे को नजरअंदाज कर, भारतीय हितों को प्राथमिकता दी. परिणामस्वरूप, वैश्विक स्तर पर मोदी की स्वीकृति दर 75 प्रतिशत से अधिक हो गई.

75 साल की उम्र में भी नई ऊर्जा: देश की अर्थव्यवस्था तीसरी सबसे बड़ी बनने की ओर बढ़ रही है, ऐसे में मोदी के सामने आने वाली हर चुनौती एक नए अवसर में बदल रही है. बचपन में चाय बेचने वाला लड़का, अब विश्व नेताओं को अपनी शर्तों पर वही चाय परोसने की स्थिति में पहुंच गया है.

प्रधानमंत्री के 75वें जन्मदिन का स्वागत करते हुए, उनके राजनीतिक जीवन के अंत की भविष्यवाणी करने वालों की उम्मीदें धूमिल हो गई हैं. चाहे जितनी भी चुनौतियां हों, मोदी उन्हें जीत की सीढ़ियों में बदलते हुए भारतीय राजनीतिक इतिहास में एक विशेष अध्याय लिख रहे हैं.

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