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Russia US Greenland Clash: Greenland News| Why Greenland is Important| ग्रीनलैंड क्यों चाहता है अमेरिका – ग्रीनलैंड के भी राष्ट्रपति बनोगे क्या? पुतिन के जिगरी यार ने ट्रंप को चिढ़ाया, जल्दी करो वरना रूस आ जाएगा

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Russia US Conflict on Greenland: ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बहुत सीरियस हैं लेकिन वे जिस दुश्मन के खिलाफ खड़े हो रहे हैं, वो अलग ही मूड में है. रूसी सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष और पुतिन के बेहद करीबी दिमित्री मेदवेदेव ने हाल ही एक पोस्ट के जरिये अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ग्रीनलैंड पर चेतावनी दी है. मेदवेदेव ने लिखा कि ट्रंप को ग्रीनलैंड पर कब्जा करना है तो जल्दी कर लेना चाहिए. मेदवेदेव ने चुटकी लेते हुए लिखा है – ‘वहां कुछ दिनों में एक अप्रत्याशित जनमत संग्रह हो सकता है, जिसमें द्वीप के 55,000 निवासी रूस में शामिल होने के लिए वोट कर सकते हैं.’

रूसी न्यूज एजेंसी तास के मुताबिक मेदवेदेव का ये एक्स पोस्ट व्यंग्य के लहजे में लिखा गया है. मेदवेदेव ने ये भी लिखा है कि अगर ऐसा हुआ तो इससे अमेरिकी झंडे पर कोई नया सितारा नहीं जुड़ेगा, बल्कि रूस को अपना 90वां संघीय विषय मिल जाएगा. वे आगे लिखते हैं कि अगर ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा कर लेते हैं, तो वे खुद को ग्रीनलैंड के कार्यकारी राष्ट्रपति भी कह सकते हैं, जैसा कि उन्होंने हाल ही में वेनेजुएला के बारे में कहा था. मेदवेदेव का ये पोस्ट भले ही मजाकिया लग रहा है लेकिन उनकी ये राजनैतिक चुटकी ट्रंप को झिंझोड़ने वाली है. यह रूस की ओर से ट्रंप को आर्कटिक क्षेत्र में चुनौती देने का एक तरीका है.

ट्रंप क्यों चाहते हैं ग्रीनलैंड पर कब्जा?

ट्रंप ने 2019 में पहली बार ग्रीनलैंड को खरीदने की इच्छा जताई थी, जो फिलहाल डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है. अब 2026 में, उन्होंने फिर से कहा है कि अमेरिका को ग्रीनलैंड पर नियंत्रण हासिल करना चाहिए, क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है. ट्रंप का तर्क है कि अगर अमेरिका ऐसा नहीं करता, तो रूस या चीन द्वीप पर कब्जा कर सकते हैं.

ग्रीनलैंड में आखिर रखा क्या है?

ग्रीनलैंड आर्कटिक क्षेत्र में स्थित है, जहां प्राकृतिक संसाधन जैसे तेल, गैस और दुर्लभ खनिज भरपूर मात्रा में हैं. इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन के कारण आर्कटिक के बर्फ पिघलने से नए समुद्री मार्ग खुल रहे हैं, जो व्यापार और सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं. यही वजह है कि अमेरिका की नजर इस इलाके पर है. डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सरकार ने ट्रंप के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है, लेकिन ट्रंप इसे रूस और चीन की बढ़ती मौजूदगी के खिलाफ एक कदम मानते हैं.

मेदवेदेव ने ट्रंप को चिढ़ाकर क्या जताया है?

मेदवेदेव का बयान वैसे तो दिलचस्प और मजाकिया लगता है, लेकिन यह एक व्यंग्यात्मक हमला है. उन्होंने अनवेरिफाइड जानकारी के मुताबिक जनमतसंग्रह की बात कहकर इसे एक काल्पनिक बात बनाया है लेकिन इसका टार्गेट डोनाल्ड ट्रंप और उनकी महत्वाकांक्षा है. रूस के पूर्व और प्रधानमंत्री रह चुके मेदवेदेव अक्सर सोशल मीडिया पर पश्चिमी नेताओं को निशाना बनाते हैं. यहां वे ट्रंप को याद दिला रहे हैं कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका का दावा कितना हास्यास्पद है और रूस भी इसी तरह का दावा कर सकता है.

क्या वाकई रूस ग्रीनलैंड में कराएगा जनमतसंग्रह?

वास्तव में ऐसा कुछ भी नहीं होने वाला. ग्रीनलैंड में कोई जनमत संग्रह की योजना नहीं है, लेकिन मेदवेदेव का यह कहना कि यह रूस का 90वां संघीय विषय बन सकता है, जो रूस की विस्तारवादी छवि को मजबूत करता है. यह यूक्रेन जैसे मुद्दों की याद दिलाता है, जहां रूस ने जनमत संग्रह के जरिए क्षेत्रों को अपने में मिलाया था. रूस ग्रीनलैंड के मुद्दे पर ट्रंप को डरा रहा है क्योंकि वह आर्कटिक में अमेरिका की योजनाओं पर सवाल उठाता है.

क्यों इतना महत्वपूर्ण बना हुआ है ग्रीनलैंड?

ग्रीनलैंड में प्राकृतिक संसाधनों की भरमार है. रूस पहले से ही आर्कटिक में नए बेस और अभ्यास के जरिये सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहा है. ट्रंप की ग्रीनलैंड योजना को रूस एक खतरा मानता है, क्योंकि इससे अमेरिका आर्कटिक में मजबूत हो सकता है. मेदवेदेव का बयान रूस की इस रणनीति का हिस्सा है, जिससे वह अमेरिका को बताना चाहता है कि रूस क्षेत्र में प्रमुख शक्ति है और किसी भी अमेरिकी कदम का जवाब देगा. उधर डेनमार्क उस समझौते की बात करता है, जिसके जरिये अमेरिका ने खुद कहा था कि ग्रीनलैंड पर डेनमार्क का हक है और वो वहां कभी अपनी सेनाएं नहीं भेजेगा.

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