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who is maria-corina-machado: वेनेजुएला की सत्‍ता अब कौन चलाएगा? क्‍या मार‍िया कोर‍िना संभालेंगी कमान?

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काराकस/वाशिंगटन. अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को ग‍िरफ्तार कर लिया है. अमेर‍िकी राष्‍ट्रपत‍ि डोनाल्‍ड ट्रंप ने अटैक के बाद पूरी दुनिया को बताया कि मादुरो और उनकी पत्नी को ग‍िरफ्तार कर देश से बाहर ले जाया गया है. इसके साथ ही वेनेजुएला में पिछले 25 वर्षों से जमी चाविस्मो यानी ह्यूगो चावेज की विचारधारा की सत्ता की जड़ें उखड़ गई हैं. लेकिन मादुरो के जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है क‍ि वेनेजुएला की गद्दी पर कौन बैठेगा? क्या यह कुर्सी उस मारिया कोरिना मचाडो के पास जाएगी, ज‍िन्‍हें वेनेजुएला की आयरन लेडी कहा जाता है?

57 वर्षीय मारिया कोरिना मचाडो वेनेजुएला की राजनीति का वो चेहरा हैं, जिन्होंने पिछले दो दशकों से मादुरो की तानाशाही के खिलाफ संघर्ष किया है. उन्हें वेनेजुएला की सबसे निडर नेता माना जाता है. एक इंजीनियर से राजनेता बनीं मचाडो, वेनेजुएला की दक्षिणपंथी पार्टी वेंटे वेनेजुएला की संस्थापक हैं. उनकी छवि एक ऐसी नेता की है जो कभी झुकती नहीं. जहां जुआन गुआइदो और लियोपोल्डो लोपेज जैसे कई विपक्षी नेता या तो जेल गए या देश छोड़कर भागने पर मजबूर हो गए, वहीं मारिया कोरिना ने वेनेजुएला में रहकर ही मादुरो की आंखों में आंखें डालकर चुनौती दी.

नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित
मारिया कोरिना मचाडो के संघर्ष और लोकतंत्र के प्रति उनकी निष्ठा को वैश्विक स्तर पर भी सराहा गया है. उन्हें उनके अहिंसक संघर्ष और वेनेजुएला में लोकतंत्र की बहाली के प्रयासों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित होने का गौरव प्राप्त है . उनकी यह अंतरराष्ट्रीय छवि उन्हें मादुरो के बाद देश का नेतृत्व करने के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार बनाती है.

2024 का चुनाव और मादुरो का डर
मारिया कोरिना मचाडो की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि निकोलस मादुरो को उनसे डर लगता था. 2023 में वेनेजुएला के विपक्ष ने अपना संयुक्त उम्मीदवार चुनने के लिए प्राइमरी चुनाव आयोजित किए. इसमें मारिया कोरिना को 90% से अधिक वोट मिले. वे जनता की पहली पसंद थीं.

लेकिन मादुरो सरकार जानती थी कि अगर मारिया चुनाव लड़ीं, तो मादुरो की हार तय है. इसलिए, मादुरो के नियंत्रण वाले सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग ने एक पुराना और फर्जी मामला उठाकर मारिया कोरिना को 15 साल के लिए चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित (Barred) कर दिया. यह मादुरो की सबसे बड़ी गलती साबित हुई.

मचाडो ने कर दिया खेल – कैसे पलटी बाजी?

मादुरो को लगा था कि मारिया को प्रतिबंधित करने के बाद विपक्ष टूट जाएगा या चुनाव का बहिष्कार कर देगा. लेकिन यहीं पर मारिया कोरिना ने अपनी राजनीतिक परिपक्वता दिखाई और पूरा ‘खेल’ पलट दिया. मारिया ने चुनाव का बहिष्कार करने के बजाय अपनी जगह एक प्रॉक्सी उम्मीदवार खड़ा करने का फैसला किया. पहले उन्होंने कोरिना योरिस को चुना, लेकिन उन्हें भी रोक दिया गया. अंततः उन्होंने एक शांत और पूर्व राजनयिक एडमंडो गोंजालेज उरुटिया का समर्थन किया. भले ही बैलट पेपर पर नाम गोंजालेज का था, लेकिन सड़कों पर प्रचार मारिया कोरिना कर रही थीं. उन्होंने अपनी रैलियों में लाखों की भीड़ जुटाई और नारा दिया- Hasta el Final यानी अंत तक.

जुलाई 2024 में हुए चुनावों में विपक्ष का दावा है कि एडमंडो गोंजालेज ने भारी मतों से जीत हासिल की. मारिया कोरिना की टीम ने बहादुरी से 25,000 से अधिक मतदान केंद्रों से रसीदें इकट्ठा कीं और उन्हें ऑनलाइन पोस्ट कर दिया, जिससे साबित हो गया कि मादुरो चुनाव हार चुके थे. मादुरो ने खुद को विजेता घोषित किया, लेकिन सबूत मारिया के हाथ में थे. इसी सबूत ने अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मादुरो के खिलाफ कदम उठाने का आधार दिया.

अब सत्ता कौन संभालेगा: मारिया या गोंजालेज?

मादुरो के पकड़े जाने के बाद अब संवैधानिक और व्यावहारिक सवाल सामने खड़े हैं.

1. एडमंडो गोंजालेज: तकनीकी रूप से 2024 के चुनाव में विपक्ष के उम्मीदवार एडमंडो गोंजालेज थे. विपक्ष और अमेरिका का कहना है कि वे ही चुनाव जीते हैं. इसलिए, संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार, उन्हें ही राष्ट्रपति पद की शपथ लेनी चाहिए. वे 75 वर्ष के हैं और एक सुलझे हुए राजनयिक हैं.

2. मारिया कोरिना मचाडो: भले ही राष्ट्रपति पद गोंजालेज को मिले, लेकिन वेनेजुएला और पूरी दुनिया जानती है कि असली ‘पावर सेंटर’ मारिया कोरिना मचाडो होंगी. जनता ने गोंजालेज को वोट इसलिए दिया क्योंकि मारिया ने उनसे ऐसा करने को कहा था.

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